गर्भवती के शराब सेवन से गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर

इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ पब्लिक हेल्थ ने जिला सुंदरगढ, ओड़िसा के आदिवासी क्षेत्रों में नमूना सर्वे करके पाया, कि गर्भवती रहने के दौरान शराब पीने वाले आदिवासी महिलाओं के बच्चे कम वजन के थे। कम वजन के बच्चों की प्रतिशत 40 से अधिक थी जिसे बहुत अधिक माना गया है। सर्वे में पाया गया, कि गर्भवती महिलाएँ भी अत्यधिक मात्रा में शराब पीती हैं जिसके कारण गर्भ में ही बच्चे के स्वास्थ्य में भारी असर होता है और जन्म के समय ऐसे बच्चों का वजन कम होता है । उल्लेखनीय है कि बच्चे के वजन को उनके स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है । कम वजन के बच्चे जन्म के समय ही मौत के शिकार हो जाते हैं या वे अस्वस्थ्य होते हैं ।

सुभाष संवई, डा0 देवराज मिश्र और डा0 संघमित्रा पती द्वारा किए गए अध्ययन “आदिवासी महिलाओं में गर्भकाल के दौरान शराब पीने की आदत” में पाया, कि जनसंख्या का पाँचवा हिस्सा अर्थात् सौ में से बीस महिलाओं नेे हँडिया या महुआ से बने शराब का सेवन किया ।

इन महिलाओं की अधिकतर संख्या को शराब से अपने बच्चे के सामान्य स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव के बारे पता नहीं था। सिर्फ 30 प्रतिशत महिलाएँ शराब सेवन को त्यागने के बारे सोचा करती थी । इन महिलाओं के लिए हँडिया या शराब संस्कृति का एक भाग या दवाई था, न कि नशे का कारक । इसे किसी अनुष्ठान, पर्व-त्यौहारों या किसी सामाजिक अवसरों पर दिया जाता था और अन्य लोगों के अलावा गर्भवती भी इसे ले लेती थी ।

जन्म के समय शिशु का वजन कम होने से उनकी प्रतिरोधी क्षमता कम होती है और शिशु मृत्यृ तथा संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है । गर्भावस्था में शराब के सेवन से शिशु की शारीरिक विकृति का खतरा और सामान्य विकास के क्रम में व्यावधान का खतरा बढ़ जाता है । डा0 पती का कहना है कि आदिवासियों में उच्च प्रतिशत में कमजोर बच्चों का जन्म एक चिंताजनक बात है और जनता में गर्भावस्था के समय शराब सेवन के परिणाम के बारे जागरूकता फैलाने की जरूरत है ।

यह एक चिंताजनक स्थिति हैं क्योंकि शिशु मृत्यु के मामले प्रतिशत रूप से आदिवासी क्षेत्रों में अधिक है । सुंदरगढ़ जिले के साथ राज्य के अन्य आदिवासी बहुल जिलों में भी कमवजन के शिशुओं के जन्म की प्रतिशतता अन्य क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा है ।

निरंग पझरा  :  बच्चे किसी भी समाज के भविष्य होते हैं । उनका सुंदर स्वास्थ्य पूरे समाज की सुंदरता और स्वास्थ्य का मामला होता है । समाज में शराब से बहुत हानि हो रही है, लेकिन गर्भवती के शराब पीने से जिंदगी के प्रथम दिन से ही बच्चे को समस्या होती है, जो बच्चे के भावी जिंदगी के लिए अत्यंत हानिकारक होता है । समाज में सुंदर स्वास्थ्य बच्चों का जन्म बहुत महत्वपूर्ण है । बच्चा माँ के कोख से ही जब स्वास्थ्य रूप से जन्म लेता है, तो वह आमतौर पर सुंदरता और स्वास्थ्य जिंदगी पाता है । हर एक बच्चे को स्वास्थ्य जिंदगी पाने का हक है और माँ बाप ही उसे यह सौगात दे सकते हैं । इसलिए बच्चे के जन्म के पूर्व और बाद में भी शराब से दूरी बना कर रखने से ही घर में खुशियों की किलकरियाँ गूंजती है। ’’’