विश्व सरकारों के उड़न तश्तरी दर्शन

                                नेह अर्जुन इंदवार

क्या आप एलियन में विश्वास करते हैं ? प्राप्त विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) की सरकार को एलियन पर निश्चित रूप से विश्वास है, और वे नहीं चाहते कि आम जनता इसके बारे में जानें।

2010 में सार्वजनिक रूप से जारी किए गए फाइलों में दर्ज विवरणों के अनुसार यू.के. सरकार यूएफओ (अज्ञात उड़ंत वस्तु या आम भाषा मेंं उड़न तश्तरी)  दिखाई देने के बारे में न केवल संदेह करती थी वरन वे उन्हें बहुत गंभीरता से ले रही थी।  बीबीसी के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों को मिला कर बनाई गई एक समिति के वरिष्ठ खुफिया अधिकरीगण यूएफओ दर्शन पर तैयार साप्ताहिक रिपोर्टस् के साथ चर्चा के लिए नियमित बैठकें किया करते थे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल का आग्रह था कि देश की आबादी को सामूहिक रूप से आतांकित होने से बचाने के लिए यूएफओ की पूरी जांच को छुपाया जाना चाहिए।

 

बीबीसी द्वारा संदर्भित फाइलों में हजारों पृष्ठ हैं, जिनमें से कुछ रिकार्डस् (फाईलों) पर दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी आईजेनव्हर से अपनी मुलाकात के दौरान चर्चिल ने यूएफओ दर्शन को छुपाने (कवर-अप)  करने का आदेश दिया था। इन हजारों फाईलों में 1995 से लेकर 2003 तक की रिपोर्ट में ड्रॉइंग, रिपोर्ट, पत्र और चित्र के साथ सार्वजनिक पूछताछ और संसदीय कार्यवाही के कागजात भी शामिल हैं। दिलचस्प और संभवतया  आश्चर्यजनक रूप से, बीबीसी के अनुसार टेलीविजन शो “द एक्स फाइल” की लोकप्रियता के कारण, 1996 में यूएफओ के दर्शन की खबरें बहुत बढ़ी । उस समय के आसपास, यूएफओ के दर्शन हर हफ्ते एक बार होना आम बात थी। उन दिनों यू.के. में कहा जा रहा था कि सभी यूएफओ मुठभेड़ों की जांच के लिए मुलडर और स्कॉलि (टेलिविजन शो “द एक्स फाइल” के अनुसंधानकर्ता पात्र) को यू. के. में बुलाया जाना चाहिए।  

रिकार्ड के अनुसार यह भी दावा किया गया था कि पश्चिमी साम्राज्यवादी ताकतें कहीं आगे न बढ़ जाएँ, इसलिए सोवियत संघ ने यूएफओ की जांच के लिए संसाधनों का आबंटन भी किया था, यह भी दावा किया गया था कि जरूरत होने पर वे यूएफओ के साथ बातचीत भी कर सकते हैं।

ऐतिहासिक रूप से रूस के क्षेत्र यूएफओ दर्शन से भरा हुआ है, लेकिन रिपोर्टों को गुप्त रखा गया है और सरकार इसके बारे में बात नहीं करती। नियमित रूप से लोग इसके बारे में बात करते थे, हालांकि-जैसे 1978 में, पेट्रोज़ावोडस्क में हजारों लोगों ने कुछ घंटों तक लगातार यूएफओ को अपनी आंखों से देखा था। सीआईए ने स्वाभाविक रूप से रूस की यूएफओ समस्याएं दर्ज की हैं।

                          वाशिंगटन में सिनेटरों की यूएफओ सुनवाई

29 अप्रैल 2013 को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन के नेशनल प्रेस क्लब में यूएफओ षड्यंत्र सुनवाई (UFO Conspiracy Hearing) का आयोजन किया गया था, जिसमें अमेरिकी कांग्रेस के पांच पूर्व सदस्यों, एक पूर्व सीनेटर को इस घटना को गंभीरता और विश्वसनीयता देने के लिए बुलाया गया था, जिनके लिए प्रत्येक प्रतिनिधि को 20,000 डॉलर का भुगतान किया गया । सुनवाई में अमेरिकी सरकार से दशकों से एलियनों के द्वारा पृथ्वी पर किए जा रहे यात्रा से संबंधित संभावित गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की गई।

पूर्व राजनेताओं की समिति के समक्ष गवाही देने के लिए विशेषज्ञ गवाहों को शपथ दिलायी गई और उनके बयान दर्ज किए गए। कार्यक्रम को यूएफओ पर नजर रखने वाले दुनिया भर के उत्सुक लोगों के लिए लाइव वीडियो लिंक के माध्यम से और एक साथ स्पैनिश, अरबी, हिंदी, जापानी और मंदारिन अनुवादकों के समूह द्वारा कवरेज प्रदान किए गए थे। यहां तक कि मुस्लिम नेता लुई फर्राखान ने भी एक दर्जन सुरक्षा गार्ड के साथ सुनवाई स्थल का दौरा किया।

लगभग 100 प्रतिनिधियों से भरा उद्घाटन सत्र में चर्चा करने वाले लोगों में से किसी ने भी इस बात से इंकार नहीं किया कि एलियन के पृथ्वी यात्राओं को सरकारों द्वारा आम जनता से छुपायी जा रही है।

2011 में, व्हाईट हाउस ने इस विषय पर दायर एक याचिका पर औपचारिक रूप से जवाब में कहा था कि इस तरह की कोई कवर-अप नहीं की जा रही है। ” ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं है कि हमारे ग्रह के बाहर कोई भी जीवन मौजूद है, या उपस्थित किसी परग्रही प्राणी से संपर्क किया गया है, या मानव जाति के किसी भी सदस्य उससे जुड़े हुए हैं,” व्हाइट हाउस ने जवाब दिया। “इसके अलावा, यह सुझाव देने के लिए कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं है कि किसी भी सबूत को जनता की आंखों से छिपाया जा रहा है।”

लेकिन सरकार के उस आधिकारिक हस्तक्षेप बयान ने केवल उन लोगों के बीच नाराजगी को बढ़ाने का कार्य किया, जो एलियंस पर एक विशाल सरकारी साजिश में विश्वास करते हैं।

एक गवाह रिचर्ड डोलन, जिसने इस विषय पर कई पुस्तकें लिखी हैं, के अनुसार दो प्रमुख कांस्पाईरेसी  वेबसाइट द्वारा हर साल 10,000 से अधिक अलग-अलग यूएफओ देखने की सूचना दी जाती है। लिंडा मॉलटन होवे, एक पूर्व वृत्तचित्र निर्माता  ने कहा कि एलियंस “डायनासोर से पहले” से ही पृथ्वी पर आते रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम ऐसे विकसित प्रौद्योगिकी वाले एलियन के बारे बात कर रहे हैं जो “अंतरिक्ष और समय” को मन चाहे रूप से मोड़ लेते हैं।

जिन नेताओं ने समिति की स्थापना की,  उन्हें सामने आने वाले गवाहों की जांच करने के लिए केवल पांच मिनट दिए गए। लेकिन उन्होंने अपनी मौजूदगी और $ 20,000 “मानदेय” का बचाव किया। 

कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट सदस्य लिन वूल्सी ने कहा, “अगर मुझे लगता है कि यह मेरी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक है, तो मैं नहीं आया होता।” “मैं यहां हूं क्योंकि मुझे पारदर्शिता में विश्वास है।

मैरीलैंड की टी पार्टी रिपब्लिकन के रॉस्को बर्टलेट, जो दस बार कांग्रेस की सदस्य रहे और जिन्होंने सदन की सशस्त्र सेवाओं के उप-समिति की अध्यक्षता की, ने कहा, “एलियन बाइबिल विरोधी नहीं हैं।  सीनेटर माइक बजेल, जो 22 साल के लिए अलास्का का प्रतिनिधित्व करने वाला डेमोक्रेट थे, ने कहा: “यह सोचना मानव अहंकार की पराकाष्टा होगी कि ब्रह्मांड में एकमात्र संवेदनशील प्राणी इंसान हैं। 

शीतयुद्ध के अंत के बाद भी दृढ़ता  से कवर-अप जारी रहने के लिए गवाहों ने कई कारण दिए। भौतिकी में दो डिग्री रखने वाले स्टैंटन फ्राइडमैन ने कहा: “अगर पोप और इंग्लैंड की महारानी  कुछ ऐसी घोषणा कर दे, तो क्या होगा ? युवा लोग खुद को टेरैन के रूप में देखेंगे और राष्ट्रों के प्रति अपनी निष्ठा खो देंगे।

केवल एक राजनीतिज्ञ, डेमोक्रेट कैरोलिन किलपेट्रिक मिशिगन, ने, “छद्म सुनवाई” की प्रक्रिया के बारे में शिकायत की, उन्होंने पूछा कि समिति ने पहले से क्यों लिखित सबूत प्राप्त नहीं की ?

                                                               

                          अमेरिकी  राष्ट्रपति का एलियंस मुलाकातें 

एंथनी बॉन्ड द्वारा लिखित और डेली मेल ऑनलाइन में 15 फरवरी 2012 को प्रकाशित एक आलेख के अनुसार पेंटागन के एक पूर्व परामर्शदाता (former Pentagon consultant) ने दावा किया है कि अमेरिकी  राष्ट्रपति ड्वाइट डी आईजेनव्हर ने अंतरीक्ष से आए एलियंस के साथ तीन गुप्त बैठकों की थीं।  

उक्त दावे के अनुसार  पूर्व-राष्ट्रपति ने तीन अलग-अलग अवसरों पर न्यू मैक्सिको एयर फोर्स बेस में एलियंस (अंतरिक्ष से आए प्राणियों) से मिले थे ।  राष्ट्रपति ड्वाइट डी आईजेनव्हर और एफबीआई के अधिकारियों ने ‘टेलिपाथिक संदेश’ भेजकर बैठकों का आयोजन किया था।

सार्वजनिक व्याख्याता और स्थापित लेखक तिमोथी गुड के अनुसार 1954 में संयुक्त राज्य अमेरिका के 34 वें राष्ट्रपति, न्यू मैक्सिको में एक दूरदराज के हवाई अड्डे पर एलियंस से मिले थे, कहा गया है कि राष्ट्रपति ड्वाइट डी आईजेनव्हर और अन्य एफबीआई अधिकारियों ने ‘टेलिपाथिक संदेश’ भेजकर अंतरिक्ष प्राणियों के साथ बैठक का आयोजन किया था।

हालांकि साजिश सिद्धांतकारों (Conspiracy theorists) ने कुछ महीनों तक ये बातें कहते रहे थे, कि कमांडर-इन-चीफ और दूसरे ग्रह के लोगों के बीच की बैठकें हुई थीं। लेकिन आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की थी, और इसे तब आधारहीन अफवाह माना गया जा रहा था। 

लेकिन एलिएंस मिटिंग के बारे  किसी प्रमुख अकादमिक द्वारा सार्वजनिक रूप से दावा (पुष्टि) करने वाले  पहले व्यक्ति अमेरिकी कांग्रेस और पेंटागन के पूर्व परामर्शदाता श्री तिमोथी गुड बने।

बीबीसी 2 के पत्रकार फ्रैंक स्किनर के करेंट अफेयर (टीवी) कार्यक्रम  “Opinionated” में बोलते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर में अनेक सरकारें कई दशकों से एलियंस के साथ नियमित संपर्क में रही है।

उन्होंने कहा, ‘एलियंस ने पूरे विश्व में हर तरह के हजारों लोगों के साथ औपचारिक और अनौपचारिक संपर्क किया है।’

यह पूछे जाने पर कि क्यों एलियंस बराक ओबामा की तरह किसी ‘महत्वपूर्ण’ (व्यक्ति) के पास नहीं जाते, उन्होंने कहा: ‘ठीक है, मैं आपको निश्चित रूप में बता सकता हूं कि 1954 में राष्ट्रपति ड्वाइट डी आईजेनव्हर ने एलियंस के साथ तीन मुठभेड़/मुलाकात (three encounters), की थी, जो न्यू मैक्सिको के हॉलीमन एयर फोर्स बेस सहित कुछ अन्य एयर फोर्स बेस में हुई थी।’ उन्होंने कहा कि वहाँ ‘कई गवाह’ मौजूद थे।

1953 से 1961 तक राष्ट्रपति रहे ड्वाइट डी आईजेनव्हर, को अन्य ग्रहों पर जीवन होने के एक मजबूत विश्वासी के रूप में जाना जाता है।

संयुक्त राज्य सेना के पूर्व पांच सितारा (Five starred) जनरल, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप में मित्र देशों की सेना (ओं) की कमान संभाली थी, वह भी यू.एस. अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक था। माना जा रहा है कि वे ‘’मिटिंग” में गवाह के रूप में मौजूद रहे होंगे।

कहा जाता है कि परग्रही प्राणियों के साथ राष्ट्रपति की बैठक तब हुई थी, जब अधिकारियों को बताया गया था कि वे फरवरी 1954 में कैलिफोर्निया के पाम स्प्रिंग्स में छुट्टी पर थे।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Eisenhower

प्रारंभिक बैठक ‘नॉर्डिक’ सदृष्य रंग रूप वाले एलियनों के साथ हुई थी, लेकिन अंततः ‘ग्रे’ एलियन नामक एक प्रजाति के साथ एग्रीमेंट ‘हस्ताक्षरित’ किया गया था।

श्री गुड ने आगे कहा ‘हम जानते हैं कि 90 प्रतिशत तक के सभी यूएफओ रिपोर्टस् को पारंपरिक शब्दों में समझाया जा सकता है। हालांकि, मैं कहूंगा कि दुनिया भर में करोड़ों लोगों ने वास्तव में असली चीज़ देखी है।’

2010 में रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए गए वर्गीकृत दस्तावेजों के मुताबिक, विंस्टन चर्चिल ने यूएफओ की सूचनाओं और विवरणों को गुप्त रखा जाने का आदेश दिया था।

कहा जाता है कि विंस्टन चर्चिल ने ड्वाइट डी आईजेनव्हर के साथ “यूएफओ दर्शन से कैसे निपटा जाए” विषय पर चर्चा की थी।

 

                रूसी प्रधान मंत्री ने बुद्धिमान परग्रही जीवन की मौजूदगी की पुष्टि की

2008 से 2012 तक रूस के तृतीय राष्ट्रपति रहे और वर्तमान में रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेडवेडेव ने एक साक्षात्कार में कहा था– मैं आपको प्रथम और अंतिम बार बताता हूँ – राष्ट्रपति के पास एक परमाणु सूटकेस के साथ एक फ़ोल्डर होता है, जो अति गोपनीय है। इसे रूसी गुप्तचर सेवा के द्वारा तैयार किया जाता है। यह हमारे देश में एलियंस के नियंत्रण की देखरेख  करता है। राष्ट्रपति के सेवाकाल पूरे होने के बाद एक छोटे से परमाणु सूटकेस और दो फ़ोल्डर्स को नए राष्ट्रपति को स्थानांतरित कर दिया जाता है। कितने एलिएंस हमारे बीच हैं, यह मैं कह नहीं सकता क्योंकि इससे भारी अफरा तफरी शुरू हो सकती है।

उन्होंने एक रूसी वृत्तचित्र का भी जिक्र किया और कहा यदि इस आप विषय में रुचि रखते हैं तो “द मेन इन ब्लैक” देखें। मैं हॉलीवुड फिल्म “द मेन इन ब्लैक” की बात नहीं कर रहा हूँ।

इन बयानों से क्या निकर्ष निकाल सकते हैं?

तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेडेव ने कई दिलचस्प टिप्पणियां की थी,  उनमें से एक तथ्य यह है कि राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल की शुरुआत में हमारे ग्रह पर मौजूदगी रखने वाले एलिएंस प्राणियों पर वर्गीकृत जानकारी दी जाती  है। इस से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि इस विषय से निपटना राष्ट्रपति या प्रधान मंत्री की जिम्मेदारी और काम नहीं हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री केवल देशों के “गुप्त सेवा” से ब्रीफिंग प्राप्त करते हैं। दिलचस्प है,  मेदवेडेव 2008 से 2012 तक राष्ट्रपति रहे,  मेदवेदेव से पूर्व, 2000-2008 तक व्लादिमीर पुतिन राष्ट्रपति थे। इसलिए उन्हें कुछ समय से लिए गुप्त बातों के बारे खूब ‘पता’  रहा होगा। अधिक संभावना है कि प्रमुख ‘गुप्तचर सेवा’ समूहों के प्रमुख, जो एजेंसियों में अपने पूरे कॅरिअर के दौरान कार्यतर रहते हैं, वे राष्ट्रपति की तुलना में अधिक जानकार होंगे, क्योंकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तो बहुत कम अवधि के लिए कार्यरत होते हैं।

सीआईए के भूतपूर्व जासूस एडवर्ड जोसेफ स्नोडेन ने संयुक्त राज्य अमेरिका से भागने के बाद अपने एक प्रथम सार्वजनिक खुलासे में कहा था कि अमेरिका में ब्लैक बजट कार्यक्रम का संचालन प्रशासन के शक्तिशाली लोग करते हैं और वे किसी के प्रति जवाबदेह नहीं होते हैं।  इस खुलासे से उच्च पदों पर विराजे स्थायी अधिकारियों के अत्यंत प्रभावशाली होने का अनुमान लगाया गया। कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री, पॉल हेलिअर ने काले बजट परियोजनाओं में जाने वाले अरबों डॉलर का संकेत दिया था जिसमें कांग्रेस और राष्ट्रपति को जानबूझकर अंधेरे में रखा गया था।

गुप्त दस्तावेजों तक पहुँच रखने वाले प्रभावशाली और शक्तिशाली व्यक्तियों के ये बयान जिसमें अमेरिकी नेशनल सिक्युरिटी एजेंसी, रूसी नेवी भी शामिल हैं, हजारों यूएफओ फाइलों और दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद आए हैं।

एक और दिलचस्प टिप्पणी यह ​​थी कि प्रधान मंत्री मेदवेडेव ने इस तथ्य का संकेत दिया था कि राष्ट्रपति को  परमाणु सूटकेस प्राप्त होता है। कई ऐसे सबूत भी हैं जो दिखाता है कि यूएफओ से आने वाले एलिएंस दुनिया भर में कई वर्षों तक परमाणु मिसाइलों को निष्क्रिय करते रहे हैं और व्यापक रूप से छिड़ने वाले किसी भी भयानक परमाणु युद्ध को टालते रहे हैं।

सबसे अंत में लेकिन बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि मेदवेडेव बताते हैं कि गोपनीयता का एक कारण यह है कि एलियंस के बारे बातें सार्वजनिक होने पर दुनिया में आतंक फैल सकता है। इसीलिए जिम्मेदारी से बंधे लोग यूएफओ और परग्रही प्राणियों के बारे गोपनीयता बरकरार रखना चाहते है क्योंकि वे आबादी को डरना नहीं चाहते हैं।

दिमित्री मेडवेडेव

दूसरी तरफ, बहुत से ऐसे लोग हैं जो यूएफओ की गोपनीयता के पीछे के भय के तर्क के परे जा कर कहते हैं कि इनमें से कुछ चिंता तकनीकी प्रभाव, एलिएंस के पृथ्वी में आने  और मानवता को नए अवधारणाओं के प्रति सोचने के लिए समय देने आदि कई कारण शामिल  हैं। यह भी कहा जाता है धरती पर हमारे वर्तमान सामाजिक, धार्मिक ‘सत्ता संरचना’ या वित्तीय और आर्थिक ढांचा को खतरा हो जाएगा और मौजूदा वैश्विक मुद्रा, व्यापार, राजनैतिक संबंध, आर्थिक और शासन ढांचे से बेपनाह लाभ लेने वाले सत्ता, प्रतिष्ठान और समाज बर्बाद हो जाएँगे और समाज में भारी उथलपुथल मच जाएगी।

लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि बदलाव के लिए सभ्यता के पास चुनाव करने का समय आ गया है। हमारी पृथ्वी पर भारी पर्यावरण असंतुलन,  प्रदूषण, क्षुद्र ग्रहों से टक्कर, परमाणु युद्ध आदि कई खतरे मंडरा रहे हैं, जिनसे पृथ्वी के नष्ट हो जाने और मानवीय सभ्यता तथा खरबों अन्य प्राणियों की वजूद खत्म हो जाने का डर बढ़ गया है। विकास की प्रक्रिया से गुजर रही सभ्यता को किसी दयालु एलियंस सभ्यता से हमारी मानवीय वजूद और खरबों अन्य प्राणियों  बचाने के लिए एकमत होने की जरूरत आन पड़ी है।।