पारसी सोना खदान की लीज रद्द नहीं हुई तो होगा नेशनल हाईवे जाम

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नेह अर्जुन इंदवार 

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दो वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापाड़ा जिले में स्थित बाघमारा (सोना खान) की नीलामी के बाद झारखण्ड के तमाड़ स्थित परासी सोनाखान की नीलामी ने आदिवासी क्षेत्रों में खलबली मचा दी है। संविधान के पाँचवी अनुसूची के प्रशासनिक क्षेत्रों में स्थित इन बहुमूल्य खानों की नीलामी में कई कानूनों के खुल्लमखुला उल्लंघन का आरोप लग रहे हैं। झारखंड के आदिवासी  मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले राजनैतिक पार्टियों ने सरकार से मांग की है कि तमाड़ के परासी सोनाखान की नीलामी को रद्द किया जाए। ऐसा नहीं करने पर वे वृहद स्तर पर आंदोलन करने के लिए तैयार हैं।  

झारखण्ड, ओडिसा, छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में देश के अधिकतर प्राकृतिक खनिज पदार्थ मिलते हैं। इन राज्यों के अधिकतर जिले संविधान की धारा 244 (1) अंतर्गत अनुसूचित जिले घोषित किए गए हैं और इन इलाकों में पेसा कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। पेसा कानून में आदिवासियों के ग्राम सभा को कई अधिकार हासिल है और आदिवासी इलाकों में खनन कार्य के लिए ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है। इसी कानूनी धाराओं  तथा वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने ओडिसा के नियमगिरी पहाड़ों पर ग्राम सभा की अनुमति लेने का आदेश दिया था कि ग्राम सभा का आयोजन करके स्थानीय निवासियों से यह पूछा जाए कि वे खनन चाहते हैं या नहीं।   

15 सालों से जियोलॉजिकल विभाग झारखण्ड के विभिन्न जिलों में बहुमूल्य खनिज पदार्थों के लिए सर्वे कर रहा था । उसके अनुसार झारखण्ड के तमाड़ क्षेत्र में  7.47 मिलियन टन सोने के भण्डार मौजूद है। यहाँ की मिट्टी में प्रति टन 0.5 ग्राम सोना मिल सकते हैं।

वहीं सिंहभूम के आनंदपुर तालुका के पहाड़डीहा, रूंगीकोचा और टेंटाडीह गाँवों में 1.6 मिलियन टन सोने का भंडार है जिसकी मिट्टी में प्रति टन 12.2 ग्राम बहुमूल्य धातु मिलने की बात कही गई है।

पहाड़डीहा क्षेत्र में कई अन्य बहुमूल्य पदार्थ भी मौजूद है, जिनमें अनुमान के अनुसार चाँदी (1.16 टन), ताँबा (232.4 टन), शीशा  (581 टन), जिंक (1,859 टन), निकल  (2,905 टन) और क्वार्ज (1.16 मिलियन टन) मौजूद  है।

छत्तीसगढ़ के बाघमारा में स्थित सोने खान की नीलामी प्रक्रिया में लंदन स्थित कारपोरेट घराना वेदांता कंपनी के हाथ लगी थी। जिसकी नीलामी में कोलकाता की रूंगटा ब्रादर्स ने भी भाग लिया था। बाघमारा की नीलामी में छत्तीसगढ़ की दो लाख से भी कम की पूँजी की एक स्थानीय कंपनी भी शामिल हुई थी।

झारखण्ड में पेसा कानून का अनदेखा करके ग्राम सभा की अनुमति प्राप्त किए बिना परासी सोने के भंडार की नीलामी किए जाने पर बवाल मचा हुआ है। समझा जाता है कि सोने की खनन से बड़ी संख्या में गाँववासी विस्थापित होंगे।  आदिवासी जन परिषद ने परासी सोना खान के आवंटन के विरोध में मंगलवार  5 दिसंबर 2017 को राँची में राजभवन के समक्ष धरना आयोजित  किया था। परासी में खनन से विस्थापित होने वाले किसानों की एक बड़ी संख्या इस धरने में शामिल थी और वे नीलामी रद्द नहीं होने पर राँची जमशेदपुर राजपथ को जाम करने के साथ झारखंड बंद करने की घोषणा भी की है।

आदिवासी हितों की लड़ाई लड़ने वाले जन संगठन राज्य में समता जजमेंट लागू करने की मांग करu रहे हैं और इसके लिए जनसंघर्ष करने की घोषणा की हैॆ। उल्लेखनीय है कि विभिन्न परियोजनाओं के कारण देश में बड़ी संख्या में आदिवासी विस्थापित हुए हैं और सरकार द्वारा उनका पुनर्वास ढंग से नहीं किए जाने के कारण खाते पीते किसान विपन्न जिंदगी जीने के लिए मजबूर हो जाते है। कड़वे अनुभव से पीड़ित आदिवासी  अपने इलाके में होने वाले किसी भी संभावित विस्थापित से भयभीत हो जाते हैं।