अजीब काल्पनिक कहाँनियाँ

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दुनिया में अब तक कही गई, लिखी गई, बताई गई दस अरब, चार करोड़ उन्नीस लाख, सतावन हजार, आठ सौ उन्नहत्तर  कहानियों में से दस अरब, चार करोड, पाँच कहानियाँ विशुद्ध कहानियाँ काल्पनिक थीं। आप हैरान होंगे कि इतनी सारी कहानियाँ काल्पनिक कैसे हो सकतीं है ? पर मैं उन्हें काल्पनिक ही मानता हूँ, इसका पुख्ता कारण भी है। आज तक जितनी भी सच्ची कहानियाँ पाठकों, श्रोताओं और जाँच-पड़ताल वालों को सुनाई गई है, उनमें काल्पना की छौंक लगा कर ही परोसी गई है। अपनी जीवनी लिखने वाले, सच्ची कहानी लिखने वाले लेखकों के पास किसी कहानी के पात्र की कितनी बातें सच्ची-सच्ची और यथा घटित विवरण के साथ होती हैं। तमाम सच्ची और वास्तविक कहानियों में लेखक-रिपोर्टर अपनी ओर से कहानियों की डायलॉग अपने तई अपने दिमाग से नहीं लिखते हैं इसकी क्या गारंटी होती है ? बस लिखने वाला इतनी कोशिश जरूर करता है कि किसी पात्र के जीवन में घटी घटनाएँ वास्तविक लगे और इस वास्तविकता के लिए वह काल्पनिकता की तड़का लगाता है।

बड़े-बड़े ऑटोबायोग्राफी लिखने वाले अपनी किताबों के मार्केटिंग करते हुए कहते हैं मैंने इस किताब में अपने जीवन की तमाम सच्ची घटनाओं को विस्तार से लिखा है। ऐसे बयानों को पढ़ कर हँसी आती है। भई 99 वर्ष के जीवन में घटित हर घटनाओं को विस्तार से सच्ची-सच्ची लिखी जाए तो वह कुछ चार लाख पचास हजार नौ पन्ने के हो जाएँगे। बायोग्राफी पढ़ने वाले पाठकों की तो जिंदगी निकल जाएगी एक ही बायोग्राफी पढ़ते फिर वह खाक उस सच्ची किताब पर अपनी कोई प्रतिक्रिया बताने के लिए समय निकाल पाएगा। इसलिए मैं जब कहता हूँ कि दस अरब, चार करोड, पाँच कहानियाँ विशुद्ध कहानियाँ काल्पनिक थीं तो आपको उसे न चाहते हुए भी विश्वास करने के लिए कुछ पल जरूर सोचना चाहिए। सोचना क्या आप जरूर सोच रहे होंगे, कुछ तो……।