काम न करने वाले नेताओं को धन्यवाद ज्ञापन

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Neh Indwar    May 24, 2019, 11:43 AM.

#ATTENTION_OF_DOOARS_TERAI:-
दोस्तों, अपने मुँह मिठ्ठू के तर्ज पर मैं कहना चाहता हूँ कि डुवार्स तराई के चाय मजदूरों के शोषण, पीड़ा, संघर्ष, शोषकों की दमनकारी नीतियों और उनके मौलिक तथा नागरिक अधिकारों को केन्द्र में रख कर पिछले दो महीने में मैंने 50 से भी अधिक लेख, रचनाएँ, पोस्ट, लम्बे कामेंट्स आदि लिखे। मैं भारत का एक क्षुद्र नगण्य-सा नागरिक हूँ, और निठल्लेपन में लिखने के शौक और कर्तव्य के कारण पश्चिम बंगाल के सत्ताधारी पार्टी के नीतियों के विरूद्ध लगातार अपना कलम चलाया। मैं किसी व्यक्ति विशेष का विरोधी नहीं हूँ, लेकिन मैंने चाय मजदूरों के न्याय पाने के राह में रोड़ा बने पार्टी और नेताओं के घमंड, अहंकार, शोषक, सामंती भावनाओं के विरूद्ध में अपनी कलम चलाया। चाय मजदूरों को दैनिक 176 रूपये की भीख देने वाले बेशर्म लखपति, करोड़पति, अरबपति, पूँजीपति, राजनैतिक नेता, एमएलए, एमपी, ठेकेदार आदि जो इन भावनाओं से ओतप्रोत हैं और उन्हें न्यायपूर्ण मजदूरी और नागरिक अधिकार, सुविधाएँ नहीं देना चाहते हैं, के विरूद्ध मजदूरों के संघर्ष में मैंने अपनी एक छोटी सी भूमिका निभाने की कोशिश की थी। मैं चाहता था कि सत्तधारी पार्टी अलिपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग आदि सीट हार जाए, भले वहाँ कोई भी जीते। इन सीटों की हार से सत्तारूढ़ पार्टी का अहंकारी खुमार टूट सकता है। संक्षिप्त बात यह है कि जो पार्टी क्लासिकल समस्याओं को नहीं सुलझा सकती है, उसे सत्ता में रहने का अधिकार भी नहीं है।
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अंततः रिजल्ट मेरी इच्छा और व्यक्तिगत रणनीति के अनुकूल रहा। इसके लिए मैं निम्नलिखित महानुभावों को धन्यवाद देना चाहता हूँ। इनके सक्रिय सहयोग, इच्छा और विशेष कार्यनिष्पादन के सिवाय लोकसभा चुनाव में यह परिणाम नहीं मिलता। यदि मैंने एक प्रतिशत कोशिश की होगी तो ये महान लोग शर्तिया 99% कोशिश किए हुए हैं।
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मैं सत्ताधारी दल के कोलकातावासी ट्रेड यूनियन नेत्री #सेन महोदया और पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री #घटकजी का हीरकमय #शुक्रियाअदा करना चाहता हूँ, जिन्होंने पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के बाद अपनी पार्टी के स्थानीय नेताओं की आवाज़ को दबा कर लगातार चाय बागान मालिकों के साथ मिल कर मजदूरों के न्यूनतम वेतन आंदोलन को पैरों तले कुचला और अपने दल को विश्वास दिलाया कि अनपढ़ चाय मजदूर राजनैतिक रूप से जागरूक नहीं है और उन्हें कुछ खोखले वादा करके बहलाया जा सकता है और उनका वोट्स पिछले चुनाव की तरह की झटक लिया जा सकता है। उन्होंने चाय मजदूरों को भिखारी की तरह अंतरवर्तीकालीन मजदूरी देकर खुश करने की कोशिश किया। न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति के बैठक का लगातार अभिनय कराता रहा। मजदूरों के पीएफ और ग्रेज्युएटी को लुटवाता रहा। भूख और बीमारी से मरने के लिए मजबूर कराता रहा। इन दोनों महान व्यक्तियों के दैनिक खर्च ही कई हजार रूपयों का होता है और पाँच सितारे स्तर की जिंदगी जीते हैं। लेकिन इन्हें पाँच लाख गरीब मजदूरों की असहनीय पीड़ा, दुख-दर्द, गरीबी, बीमारी, लाचारी दिखाई नहीं देता है और वे मजदूरों को कीड़े मकोड़ों की तरह मसल देने लायक समझते रहे हैं। चाय मजदूरों के प्यारी दीदी सिनगी दई यानी ममता बनर्जी को चाय बागानों में हराने के लिए इन दोनों महानुभावी, महान लोगों ने जितना परिश्रम किया है, उतना परिश्रम तो विपक्षी पार्टियों के किसी नेता ने जिंदगी भर नहीं की होगी। तो भाईयों सत्ताधारी पार्टी को हराने के लिए बहुत परिश्रम करने वाले इन दो महान नेताओं को बहुत- बहुत बधाई और धन्यवाद।
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महान कार्य के लिए धन्यवाद पाने के पात्र तो सत्ताधारी पार्टी के डुवार्स और तराई के नेता-कार्यकर्ता (कार्यकर्ता बोले तो बड़े कार्यकर्ता, छोटे मोटे वाले नहीं), एमपी, एमएलए और उत्तर बंगाल में मंत्री पद संभालने वाले भी हैं। उन्हें भी बीजेपी को बंपर वोट से जीताने के लिए लगातार मेहनत करने के लिए बधाई। उनके सहयोग और हार्दिक इच्छा के बिना बीजेपी की जीत नहीं होती और न उनकी पार्टी तीसरे स्थान पर पहुँचती। इन्होंने अपने पद के अनुरूप क्या कार्य किए हैं यह तो वे खुद जाने, लेकिन चाय बागानों के न्यायपूर्ण मजदूरी के लिए हुए मजदूर आंदोलनों को पीछे से पिन मारने और इस मुद्दे पर खुद कुछ नहीं करने के लिए, और बीजेपी के जीत के लिए अंदरूनी रूप से कार्य करने के लिए इन्हें धन्यवाद देना तो बनता ही है। यदि ये तमाम महान लोग सिनगी दई ममता बनर्जी के सामने मजदूरों के हक और अधिकार (न्यूनतम वेतन और लैंड पट्टा के लिए) के लिए एक स्वर से मजबूत आवाज़ उठाते तो भला बीजेपी को चुनाव जीतने का मौका ही कैसे मिलता ? बीजेपी भले इन महान लोगों को धन्यवाद दे या न दे, मैं गरीब, लाचार, भूख और इलाज के अभाव में मरते और रोज अधिक गरीब होते मजदूरों की ओर से इन महान लोगों को दंडवत प्रणाम करता हूँ और हृदय से धन्यवाद देता हूँ। आशा करते हैं कि वे विधान सभा चुनाव में भी बीजेपी को बम्पर वोट से जीताने के लिए ऐसी ही रणनीति अपनाएँगे और ऐसा ही महान कार्य करेंगे।
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This tea estate (Kathalguri, Banarhat, Jalpaiguri, West Bengal India) when bankrupt several years ago, leaving hundreds of families to fend for themselves. Public services like this hospital and clinic have also stopped working. 

दोस्तों इस धन्यवाद ज्ञापन सत्र् से आप यह न समझ लेना कि मैं बीजेपी के भक्तों की पंक्तियों में शामिल हो गया हूँ। मैं एक क्षुद्र नागरिक होने के कारण आम नागरिकों के अधिकार, संघर्ष, पीड़ा, गरीबी और उनके न्यायपूर्ण संघर्ष को ही अपनी राजनैतिक पार्टी मानता हूँ और हमेशा इसी पार्टी का सद्स्य रहा हूँ। मेरे पास प्रकृति प्रदत्त जो भी निठल्ला क्षुद्र लेखन सामर्थ्य है, वह आम गरीब नागरिक पार्टी और उनके संघर्ष के साथ ही रहेगा। इतना बता देना चाहता हूँ कि आम गरीब नागरिक पार्टी का सदस्य होने के कारण मुझे किसी भी राजनैतिक पार्टी, उनके कार्यकलाप, नीतियों और उनकी नियतों पर आलोचना, समालोचना करने का संवैधानिक अधिकार हासिल है। कृपया भारतीय संविधान का articles 19 और 14 देख लें।