चाय मजदूरों के लिए संभावित नोटिफाईड वेतन

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नेह अ. इंदवार

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कल मैंने फेसबुक पोस्ट में डुवार्स तराई के दोस्तों से अनुरोध किया था कि वे उत्तरबंग संवाद अखबार की प्रति अपने पास सुरक्षित रखें।

आज के उत्तरबंग संवाद के पृष्ट 7 का अवलोकन करें। पश्चिम बंगाल सरकार ने बीएलएफ (Bought Leaf Factory) (अर्थात् कच्ची चाय पत्ती खरीद कर चाय बनाने वाली फैक्ट्री)  के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी की घोषणा संबंधी निर्देश जारी कर दिया है। नये नोटिफिकेशन के अनुसार जोन “ए” के मजदूर 26 दिनों के काम के लिए 8177.00 रूपये मजदूरी पाएँगे, वहीं जोन “बी” के मजदूर 26 दिन काम करके 7176.00 रूपये मजदूरी प्राप्त करेंगे। दैनिक आधार पर यह क्रमशः रूपये 314.50 और रूपये 276.00 आता है। उत्तर बंगाल में अधिकतर बीएल फैक्ट्री शहरों से दूर जोन “बी” में स्थित है। जाहिर है कि अब उन मजदूरों को न्यूनतम 276 रूपये दैनिक प्राप्त होंगे। उत्तर बंगाल में कुल 160 बीएलएफ है और अनुमानित रूप में उनमें 8 से 9 हजार मजदूर कार्यरत हैं। राज्य के अतिरिक्त श्रमायुक्त चंदन दासगुप्ता ने कहा है कि सरकार ने यह निर्देशिका जारी कर दिया है और बीएलएफ के मजदूर घोषित मजदूरी पाएँ, यह सुनिश्चित किया जा रहा है। सभी को सरकारी निर्देश मानना ही होगा।

इसके पूर्व भी 12 दिसंबर 2016 को सरकार ने बीएलएफ के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी नोटिफिकेशन जारी किया था। किन्तु तब फैक्ट्री मालिकों के संगठन द्वारा इसे कोलकाता हाई कोर्ट में चैलेंज किया था। प्रथम बार कोर्ट ने उस पर स्टे दे रखा था, लेकिन बाद में कोर्ट ने चैलेंज को खारिज कर दिया। इसके बाद श्रम दफ्तर ने फिर से नया नोटिफिकेशन जारी किया है। 2016 में जारी नोटिफिकेशन के अनुसार जोन “ए” के लिए  रूपये 290.23 और जोन “बी” के लिए रूपये 256.50 तय किया गया था। न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के अधीन जारी होने वाले वेतन नोटिफिकेशन में महंगाई भत्ता भी जोड़े जाते हैं। 2016 के वेतन और 2019 के वेतन में जो अंतर दिखाई दे रहा है, वह इसी महंगाई भत्ते के कारण है। सरकार को हर छह महीने में महंगाई भत्ते को जोड़ कर नया नोटिफिकेशन निकालना होता है। हर छह महीने में तदनुसार वेतन में बढ़ोत्तरी होती है।

सरकार के इस कोशिश के बीच चाय बागान और फैक्ट्री मालिकों ने तराई के अपने एक कार्यालय में मजदूर संघों से सीधे समझौते करने के लिए एक बैठक आयोजित करने की घोषणा किया था। माना जा रहा था कि उनका प्रयास सरकारी नोटिफिकेशन को जारी करने से रोकने का प्रयास था। खबरों में कहा गया है कि वह बैठक हुई नहीं।

इन तमाम खबरों और दाँव पेंच के आलोक में चाय बागानों में काम कर रहे दो लाख मजदूरों के न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत मांगी जा रही मजदूरी के मामले को देखना होगा। श्रम कानूनों के तहत सरकार मजदूरी तय करने के पूर्व उसे विभिन्न जोन (क्षेत्र) में बाँटती है। शहरी और नगरनिगम के क्षेत्रों को जोन “ए” में रखा जाता  है और ग्रामीन क्षेत्रों को जोन “बी” में रखा जाता है। डुवार्स तराई के 99% चाय बागान जोन “बी” में आता है। जाहिर है कि नोटिफिकेशन में जारी होने वाले वेतन निर्धारण में उन्हें जोन “बी” की मजदूरी मिलेगी। कमोबेश इतना तय है कि सरकारी गणना के अनुसार महंगाई भत्ता सहित चाय बागान मजदूरों को आज की तारीख में रूपये 276.00 से कम नहीं दिए जा सकते हैं।

चाय बागान में अनेक फ्रिंज बेनेफिट हैं। राशन के बदले मजदूरों को 660 रूपये मिलने चाहिए। लेकिन श्रम दफ्तर ने इसे दैनिक 9 रूपये करके मासिक 234 रूपये भुगतान करने का आदेश जारी किया था। यदि मजदूर किसी महीने सिर्फ तीन दिन काम करेगा तो उसे 9X3=27 रूपये ही दिया जाएगा। फिलहाल मजदूरों को सरकार को खाद्य साथी योजना के अधीन 35 केजी राशन मिलने का प्रावधान है। इसलिए मजदूर को 26 दिन काम करने के बदले 660 रूपये मिलना चाहिए। इसमें सरकार ने किस आधार और कानून के अनुसार कटौती करने का फैसला लिया है, उसे जानने का हक मजदूरों को है। इसी तरह ज्वलनी लकड़ी, क्वार्टर का किराया, विकास व्यय (Development Fund), स्कूल बस, चप्पल, जूते, छाते आदि सुविधाएँ देने के नाम पर मजदूरों के वेतन से कटौती होंती हैं। मजदूर बस्ती के जमीन को बागान लीज जमीन से अलग करने की मांग पूरी होने पर कंपनी को मजदूरों के वेतन से कटौती करके सुविधाएँ देने की जरूरत नहीं होगी। यदि फ्रिंज बेनेफिट के नाम से काटे गए तमाम कटौती को समाप्त कर दिया जाएगा, तो मजदूरों को इसके बदले कम से कम 50 रूपये और अधिक वेतन मिलेंगे। इस तरह अनुमानित रूप से जोन “बी” के चाय मजदूरों को आज की तारीख में कानूनी रूप से न्यूनतम 276.00+50.00= 326 प्रति दिन मिलने चाहिए। इसमें राशन की राशि को जोड़ दिया जाएगा तो 26 दिनों के लिए वेतन की गणना निम्नांकित होगी 326 दैनिक X 26 दिन = 8476+ राशन के 660= 9136 रूपये। इस गणना में फ्रिंज बेनेफिट को छोड़कर दूसरे सभी गणना सरकार के द्वारा नोटिफाईड गणना पर आधारित है।

इधर चाय मजदूरों के संयुक्त संगठन ज्वाईंट फोरम ने न्यूनतम वेतन नोटिफिकेशन के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पक्ष लिखने का फैसला किया है। न्यूनतम वेतन के लिए बनी सलाहकार समिति यदि अपना काम करने में फेल रहती है या एक तयशुदा समय में अपनी अनुशंसा देने में असफल रहती है तो सरकार को हक है कि वह समिति को बायपास करके अपने तई चाय बागान मजदूरों के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। चाय बागानों में मजदूरों को 24 केजी चाय पत्ती तोड़ने होते हैं। 24 केजी पत्ती से 5.33 केजी चाय बनते हैं। कोलकाता ऑक्शन मार्केट में डुवार्स तराई की चाय औसत 165 रूपये में बिकी है। यदि 5.33 केजी चाय X 165 औसत चाय के मूल्य की गणना की जाए तो यह = 938.08 रूपये आता है। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो एक मजदूर एक दिन में मालिक को 938.08 रूपये कमा कर देता है और उसके बदले उसे मालिक से रूपये 351.38 मजदूरी मिलती है या (मिलेगी)। मालिक को प्रति मजदूर रूपये 586.69 लाभ मिलता है।

चाय मजदूरों की न्यूनतम वेतन अधिनियम के अधीन न्यायपूर्ण मांग एक निर्णायक स्टेज पर आ चुका है। सरकार नोटिफिकेशन जारी करेगी, लेकिन मालिक पक्ष इसे नहीं मानेंगे और वे कोर्ट में चले जाएँगे। मजदूर संघों को चाहिए कि वे भी कोर्ट में कैवियेट दायर करके रखें, ताकि कोर्ट के द्वारा किसी फैसले लेने के पूर्व कोर्ट मजदूरों की बातों को पूरी तरह सुन लें। भविष्य की घटनाक्रम कुछ इसी तरह होगी, यह तय है। जाहिर है कि मजदूरों और मजदूर संघों को अपने दिमाग खुला रखना होगा, और सभी घटनाओं का सतर्कता के साथ अवलोकन करते रहना होगा।