गीतकार, गायक आउर रीझवार सुदर्शन कुजूर

                                                                                                                                                                                        नेह अर्जुन इंदवार 

डुवार्स तराई में आधुनिक सादरी गीत के हर झारखंडी केर दिल में पहुँचैक वाला गीतवार आउर गायक सुदर्शन कुजूर 10 मई 2012 कर दिने ई संसार से विदा लेइके सोबदिन कर लगिन स्वर्ग देस में चइल गेलंय।

सुदर्शन साहेब डुवार्स भूमि कर एक उम्दा कवि, गीतवार आउर गवैया रहंय। नब्बे कर दसक में उनकर गीत डुवार्स, तराई, झारखंड आउर असम कर हरियर वादी में गुंजत रहे। डुवार्स तराई ही नहीं, मुला जे भी जगा में सादरी भाषी झारखंडी रहेन, उ सोब जगा में उनकर लिखल आउर गावल गीत कर बिना कोनो भी उत्सव पूरा नी होवत रहे। आईज बहुत रकम कर सादरी गीत गावल आउर बजाल जायला, मुला एकठो समय रहे जे बेरा सिरिफ सुदर्शन साहेब कर गीत बजत रहे आउर गावल जात रहे। उनकर लिखल गीत में मिठास, दिल्लगी, मस्ती आउर आदिवासी समाज कर लगीन दरद रहे।

सुदर्शन साहेब सादरी में गीत लिखत रहंय आउर संगे-संगे ऊ गीत के नवा राग में गाय के भी सुनात रहंय। सादरी गीत में असमिया आउर बंगला गीत कर मिठास मिलल रहत रहे। उनकर गीत मन बहुत बागरा लोकप्रिय रहे आउर एखन भी उनकर गीत मनक कोनो जवाब नईखे। डुवार्स में कोनो भी ठन कोनो भी कारिकरम होवत रहे से बेरा सुदर्शन साहेब कर गीत के ही मुख्य रूप से गावल जात रहे। सोबे कोई ऊ गीत मन के उनकर आवाज में ही सुनेक चाहत रहंय आउर सुदर्शन साहेब के सोब बट ले नेवता मिलत रहे। सादरी समाज में जे बेरा अपन पारंपारिक लोकगीत मन कर सिवा आउर कोनो गाना नी होवत रहे, से बेरा सुदर्शन साहेब कर आधुनिक गीत एक नवा हवा कर झोंका लेखेन आलक आउर पूरा समाज के अपन नवा गीत आउर संगीत से मतवाए देलंय।

सुदर्शन साहेब से हमर (नेह अर्जुन इंदवार) पहिला मुलाकात सन् 1978-79 में नकाडाला बस्ती में सेठराज लकड़ा कर सादी में होय रहे। सादी कर कारिकरम में सुदर्शन कुजूर – “तोर माय बाप देलंय बिहा रे, एसेन सुंदर घर छोईड़ जाबे कहाँ रे ……….” गालक।  गीत सुईन के सोब कोई मोहांय गेलंय। सुदर्शन साहेब से मिलके मोय बहुत खुश होलों। मोय खुद भी कविता लिखत रहों आउर शास्त्रीय संगीत सिखेक कर लगीन क्लास करत रहों। मोके अपन शौक जैसन शौक रखेक वाला एकठो संगी कर खोज रहे। उनकर से मिलके मोके लागलक मोके एक झन मनचाहा दोस्त मिल गेलक। सुदर्शन साहेब से फिर मुलाकात कर सिलसिला शुरू होई गेलक।

सुदर्शन साहेब रेल्वे में काम करत रहंय आउर कहियो असम, कहियो कुचबिहार आउर कहियो चालसा में पोस्टेट रहंय। मुला झारखंडी कारिकरम में ऊ कहों से भी पोंहचत रहंय। स्टेज में सुदर्शन साहेब के सुनेक लगिन सोब कोई ओगरत रहंय। सुदर्शन साहेब कर हाड़ मांस में सादरी गीत आउर संगीत बसल रहे। उनकर गीतवार आउर गवैयापन से सोबे कोई उनकर प्रशंसक रहंय।

उनकर साथ में कयठो कारिकरम में संगे जाएक कर मौका मिललक । सन् 1987 में सिलिगुड़ी में प्रथम बार एकठो बड़का आदिवासी (झारखंड़ी) जमायेत होई रहे। जेकर में लेखिका महाश्वेता देवी, बांकुड़ा क्रिश्चन कोलेज कर झारखंडी प्रिंसिपल डा. अमीय किस्कु, मुंबई से सामाजिक कार्यकरता डा. बसंती रमण, राँची से डा. विश्वेशवर प्रसाद केसरी वगैरा बड़का-बड़का महापुरूष मन कारिकरम में आय रहंय। कारिकरम कर पाछे हमरे तराई कर सिमुलबाड़ी चाह बागान में एकठू आदिवासी सामाजिक करयाकरता कर घरे गेली। सुदर्शन साहेब सिमुलबाड़ी बगान आयहंय सुईन के ढेर बगरा आबदिन मन जमा होई गेलंय आउर सोबे कोई उनकर गीत सुनेक चाहत रहंय आउर फरमाईस करेक लागलंय। जनता कर मांग के देईख के मांदर झांझेर लानल गेलक।

सुदर्शन साहेब गावेक सुरू करलंय –“चलु भाई चलु, चलु बहिन चलु, सोना नियर देस हमर चलु, कि देस हमर हीरा से सुंदर, कि देस हमर रूपा रे सुंदर…………. ”  सुदर्शन साहेब कर गीत सुईन के सोब बुढ़ा-बुढ़ी, जनी छौवा मन जमा होई गेलंय आउर सोब कर आंईख से लोर टापईक टापईक के गिरेक लागलक।  बड़का बुढ़ा-बुढ़िया आयो-आबा मन अपन सोना जैसन छोटानागपुर देस के छोईड़ के  अपन पेट पोसेक लगिन ई देस में आलंय आउर फिर घुईर के नी जायेक  सकलंय। मुदा देस कर, गांव-घर केर ईयाद तो मन से कहियो नी जाएल। अपन देस कर पेयार-ईयाद सोबकर मन में रहेल। सुदर्शन साहेब कर गीत सुईन के सोबकर दिल कर भावना आंईख से लोर बईनके बहेक लगलक। पूरा राईत गीत आउर संगीत से नहाय गेलक। राइत भईर हमरे गीत-गोबिंद करली आउर दोसर दिन घुरली, मुला हामरे के बिदा देवेक लगीन केऊ हर भी राजी नी रहंय।

इसेन घटना कई बार हमर संगे होलक। सुदर्शन साहेब कर गीत आउर आवाज समाज में एक नया जागरिति लानेक शुरू कईर रहे आउर हामरे ऊ घटना मन कर साखी-गवाह बनत रही। एक हताश आदमीमन कर मन में कोनो गीत कैसन नया आसरा कर संचार करेक सकेल, उसहेने ही सुदर्शन साहेब कर गीत सादरी समाज के करत रहंय। सन् 1988-89 में चालसा कर बाबूलाल कुजूर सादरी फिल्म सांझ आउर बिहान कर शुरूआत करलंय। भला सादरी फिल्म कर गीत कर लगीन सुदर्शन कुजूर के छोईड़ के आउर केहर गीतकार होतंय ? स्वाभाविक रूप से सुदर्शन कुजूर ही ऊ फिल्म कर गीतकार आउर रसिया गवैया रहंय। सुदर्शन साहेब सांझ आउर बिहान, मोर पेयार फिल्म में अभिनय भी कईर रहंय।

"ऊँचा नीचा पहाड़ परबत नदी नाला, हाय रे हमर छोटानागपुर .............. "
“ऊँचा नीचा पहाड़ परबत नदी नाला, हाय रे हमर छोटानागपुर ………….. “

सुदर्शन कुजूर साहेब कर गीत “ऊँचा नीचा पहाड़ परबत नदी नाला, हाय रे हमर छोटानागपुर ………….. ” बहुत लोकप्रिय होलक अाउर उनकर ऊ मौलिक गीत केर उपरे अलग-अलग अंतरा जोईड़-जोईड़ के कयठो वीडियो बनाल जायहे।  उनकर गीत में केतना मिठास, दरद रहे सेके ई गीत के सुईन के ही पता लगेल। 

2012 कर उन्नीस फरवरी के अलिपुरद्वार केर रवि भट्टाचार्य बाबु टेलिफोन करलंय कि  अर्जुन बाबु रौरे का कोलकाता में मिलेक पारब ?  मोय नी जानत रहों कि रवि भट्टाचार्य बाबु कर संगे सुदर्शन साहेब भी कोलकाता आयहंय। मोय भट्टाचार्य बाबु से मिलेक कर लगिन गोलपार्क गेलों तो देखलों कि मोर पुराना दोस्त सुदर्शन कुजूर भी भट्टाचार्य कर साथ आयहंय। सुदर्शन कुजूर कर छोटका भाई जगदीश आउर कालचीनी कर साधुलाल तिर्की भी साथ में रहंय। गोठियायेक केर पाछे पता लगलग कि कोलकाता कर जादवपुर विश्वविद्यालय में सुदर्शन साहेब कर कविता आउर गीत मनकर बंगला आउर अंग्रेजी भाखा में अनुवाद करल जई। जादवपुर विश्वविद्यालय केर अनुवाद विभाग कर पढ़ैयामन अनुवाद करबंय आउर ऊ मनके सादरी कर कविता आउर गीत के बंगला, अंग्रेजी में समझाएक पड़ी।

19 फरवरी एतवार कर दिन रहे आउर मोय तैयार होईके सनकोश बागान कर दीपक कुजूर कर संगे जाए रहों। विश्वविद्यालय कर प्रोफेसर संगे मिलल पाछे पता चललक कि आईज एकठो घर में अनुवाद कर काम होवी आउर 20 फरवरी सोमवार के विश्वविद्यालय में अनुवाद कर काम होवी। मोय दूई दिन सुदर्शन साहेब कर कविता कर व्याख्या करते-करते सुदर्शन साहेब कर संगे समय बितालो। सांझ बेरा मोय घरे नेवतालो मुला समय कर कमी चाँड़हे सिर्फ चाह पी के चईल गेलंय। येहे मोर आखरी मुलाकात रहे सुदर्शन साहेब कर संगे। 21 तारीख के मातृभाषा दिवस कर दिन सुदर्शन साहेब के विश्वविद्यालय केर विशेष समारोह में सम्मान देवल गेलक। मोर बहुत इच्छा रहे ऊ समारोह में रहेक कर लगिन, मुला कयठो काम कर बाध्यता से मोय नी चाएक पारलो। ईकर मोर दिल में एकठो टीस रईह गेलक।

सुदर्शन साहेब डुवार्स तराई कर हरियर वादी के छोईड़ के हमेशा कर लगिन एक अन्जाना देस में चईल गेलंय, मुला सादरी समाज कर लगिन अपन गीत आउर संगीत कर रूप में एक थाती छोईड़ गेलंय। जोन समाज में दिल कर अंतहीन गहराई तक छुएक वाला गीत संगीत रहेल, ऊ समाज भाखा आउर संसकिरती रूप में बहुत धनी होवेल। सादरी समाज में जे बेरा लोकगीत कर सिवाय मन शरीर के सकून देवेक वाला कोनो गीत संगीत नी रहे से बेरा नया सूरज लेखेन सुदर्शन साहेब समाज में मधुरस से भरल गीत संगीत लेईके आलंय। जीवित सादरी समाज हमेशा सुदर्शन साहेब के ईयाद करी येहे उनकर प्रति समाज कर सच्चा श्रद्धांजली होवी। This work is copyright © Neh Arjun Indwar Jan.20, 2017. All rights reserved

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