बन्द बागान

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सादरी कविता

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समय नी रूकेल ककरो ले चान्द सुरूज,

पृथ्वी आपन गति में,

मुरगा भी आपन बाँक देलैं बेरा जाईन।

बजलक नहीं बागान कर बेजिवा सायरन,

भाइग गेलक अधरातिया बगान मैनेजर,

झुइल गेलक बड़का ताला दूरा गोदाम कर,

मनहूस बिहान सूनसान गाँव चिंता में बगनिया

बगान बंद बिजली, पानी, अस्पताल बंद,

साईद इखे कहेना ‘‘लॉक आउट’’

अनजान डर घर करलक सोबक मन में,

कैसन चली खाना खोराकी, चैवा कर पढ़ाई,

सीधा साधा बगानिया पड़लंय बड़ संकट में,

धीरे धीरे बीते दिन गोजाल कचिया कय दिन,

बेचाथे छेगरी, गरू सीराथे राखल गहना,

महाजन करलंय बाकी बंद,

खाली झोला देईख घरनी,

लोर ढरकाथे, घरक छौवा भूखे आकुलाथे,

घरक विपैत देइख मरद मुड़ी खपअथे,

पेट लगिन मदर गलत डहर चुनअ थंय

बनक काठी फाइर के बेचअथंय,

भूखे पेट जनी मन मिलके देखू

नदी कर ढोंगा कोडो़थंय,

खाना-पीना भईया भेलक कू-पोषण,

जंगली कुच्चू गेंठी छौवरिया

कांदा खाए के पेट भरअथंय,

नदी नाला, झोड़ा कर पानी पियाअथंय,

मलेरिया डायरिया कर शिकार होवअथंय,

बगान के बंद कइर के

कंपनी स्लो पोइजन दिवअथंय,

सब जगह देखू भाई

बगानिया आदिवासी मोरअथंय,

बगान कर हाल भैया होलक बेहाल,

लेवेक देवेक कोनो नाइखे, नखे राशन पानी,

तलब के भी किसती में देवअथे कंपनी,

अंधार घरे छौवा कांदे, दुखे आउर भूखे,

घर कर छाइन टोका, फाटल टाटी,

बेंग ढूके, ढूके साॅंप, टाप टिप चूए पानी,

आटा नखे, चाउर नखे, रखे अन्नक दाना,

साग पताड़ी कांदा काठी, भैया बनलक भरोसा,

आठ घंटा खड़े खड़े पतई तोरिला,

एक मन डेढ़ मन लाइद पीठे

पतई गोदाम पुगइला,

हाजिरी कम मेहनत मूरखे करिला,

बीता भइर पेट ले, खोराकी जोगाड़ करिला,

पीठे जहर टांगी माराअथी पिचकारी,

बिना परब मौत कर खेलाअथी होली,

जुता नइखे, ड्रेस नइखे, ना ही ट्रिटमेंट,

जिंदा लास नियर बिताअथी जिंदगी,

छेगरी गरू बेचाय गेलक,

सिरय गेलक रखल कचिया,

लाइग गेलक अंकुस, भैया छौवा कर पढ़ाई में,

मरद जनी परेशान भैया छौवा परेशान,

घरक विपैत देइख के मरद नाम कटाअथे,

काम जनी के देई मरद परदेस भगाअथे,

काइल भी गुलाम रही, आइज भी गुलाम,

बेटी बहिन आंइख भीरे होवाअथे निलाम,

मानेल नहीं मालिक पक्ष

कॉऑडिशन कर नियम,

मनमानी ढंग से मजदूर के करअथंय सोसन,

नेतामनक जाल में बगानियार बझल रहेना,

बगान मालिक मैनेजर नेता मिलल रहेना,

अपन जइन वोट देली, पंचायत के जितवाली,

जितल पाछे देखू भैया, बोलअथंय बड़बोली,

जेकर मुड़े तेल, उखे करलंय बीपीएल,

हामें गरीब मजदूर होई गेली एपीएल,

पढ़ल लिखल सिकछित मनके

करअथी हाथाजोरी,

हमरे तो अनपढ़ गंवार, बुद्धी से लाचार,

आगे बढ़ू उक्ति सोचू,

जुक्ति करू, करू उधार ।।

                    रहिमाबाद चाह बागान,

                            पोस्ट हाथीपोता,

                      शामुकतोला, अलिपुरद्वार