नये सांसद उठाएँ संसद में चाय मजदूरों के मुद्दों को

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नेह इंदवार
#Kind_Attention_of_Dooar_Terai_and_New_MP:-

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दोस्तों कल मैंने न्यूनतम वेतन और पट्टा से गरीब चाय मजदूरों को वंचित करने, उनके शोषण को जारी रखने के लिए लालची, शोषक, भ्रष्ट, अक्षम, और भावनाहीन ट्रेड युनियन #नेता#एमएलए#एमपी#मंत्री और पार्टी के #पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया था। इन लोगों की कार्य क्षमताहीन मानसिकता के कारण मजदूरों को न्याय अब तक नहीं मिला है। न्याय नहीं मिलने के कारण इनके विरूद्ध में अभियान चलाया गया और भारी असंतुष्टी के साथ बीजेपी को वोट दिया गया। बीजेपी को विजयी बनाने में सबसे बड़ा हाथ #तृणमूलकांग्रेस के महान नेताओं का रहा है।
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आज मैं लोकसभा में चुनाव जीते हुए अलिपुरद्वार के John Barlaजोन बारला, जलपाईगुड़ी के डा. जयंत कुमार राय, कुचबिहार के निशिथ प्रमाणिक दार्जिलिंग के राजू बिष्ट को बधाई देता हूँ। जनता ने उन्हें अपनी डुबती हुई आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भारी संख्या में वोट दिए और वे आज सांसद बन गए हैं। इन चारों सांसदों के लोकसभा चुनाव क्षेत्र में चाय बागान स्थित हैं और चाय बागानों की क्लासिकल समस्यों को सुलझाने का दायित्व उनके कंधों पर रख दिया गया है। फिलहाल हम नये नेतृत्व का स्वागत करते हैं। यद्यपि राजू बिष्ट को छोड़कर अधिकतर नेतागण उत्तर बंगाल की ही पृष्टभूमि से हैं और चाय बागानों की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं, लेकिन कई बातों को उनके समक्ष रखना हम उचित समझते हैं। जनता अपनी बात लगातार नेताओं के सामने रखेंगे तो नेता भी उन समस्याओं को जल्द निपटारे के लिए उत्सुक होते हैं।

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चाय बागानों की मूल समस्या #अल्प_मजदूरी, घर के जमीन का अधिकार (#पट्टा) न होना, #पीएफ और #ग्रेज्युएटी की लूट, #शिक्षा#प्रशिक्षण, रोजगारी की कमी आदि है। जिस पर नज़र डालने और ठोस रूप से कार्य करने की जरूरत है।
ये नेतागण इन समस्याओं को सुलझाने के लिए तत्कालिक रूप से क्या कर सकते हैं ?
ये सांसद संसद में चाय बागानों की निम्नलिखित बातों को उठाकर उस पर कार्यवाही की मांग कर सकते हैं।
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#1) चाय बागानों की समस्याओं पर सुप्रीम कोर्ट के रिटार्यड जज या संभव हो तो सिटींग जज को लेकर एक जाँच कमिशन (Enquiry Commission) गठन करने की मांग करें। यह कमिशन चाय बागानों से संबंधित सभी तरह के कानूनी पहलूओं पर अध्ययन करके सरकार को अपनी रिपोर्ट छह माह में सौंपे।
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#2) चाय बागानों में मजदूरों के साथ होने वाले नीतिगत, कानूनी भेदभाव, संवैधानिक मौलिक अधिकार यथा- समानता का अधिकार, रोजगार और आय में भेदभाव, सामाजिक, आर्थिक शोषण, उन्हें स्थायी और जमीनी पट्टा के साथ आवास के अधिकारों से वंचित रखने की नीतियों पर वे सम्मिलित रूप से तैयार एक रिपोर्ट को संसद में पेश करें और रिपोर्ट में दर्शाए गए बिन्दुओं पर कार्यन्वयन रिपोर्ट संसद में पेश करने के लिए प्रस्ताव पेश करें।
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#3) वे केन्द्र सरकार के अधीन कार्यरत Ministry for Labour & Employment से अनुरोध करें कि गरीब मजदूरों के Provident Fund के गबन करने वाले कंपनियों के कर्ताधर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करके ऐसे कंपनियों के रजिस्ट्रेशन को रद्द किया जाए और आर्थिक अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए।
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#4) Central Provident Fund Commissioner ऐसे आर्थिक अपराधियों को सजा देने के लिए नये दिशा निर्देश जारी करे और चाय बागानों के पीएफ घोटालों पर तत्काल कार्रवाई करने के लिए एक कार्यदल का गठन करें।
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#5) चाय बागानों में Pesticide और अन्य Chemicals के प्रयोग पर नये नियम बनाया जाए और चाय बागानों में मजदूरों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरूद् में कठोर कार्रवाई किया जाए और तत्संबंधी कार्यवाही की निगरानी केन्द्रीय एजेंसियों के द्वारा किया जाए।
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#6) पाँच एकड़ से उपर के जमीन पर चाय की खेती करने पर The Plantation Labour Act लागू होता है। वे संसद में प्रस्ताव पेश करें कि एक एकड़ में चाय की खेती करने वाले लघु उद्योग पर भी PLA में उल्लेखित लेबर कल्याण की धाराओं को लागू कराया जाए।
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#7) पश्चिम बंगाल और असम के चाय बागान सरकारी जमीन पर बनाए गए हैं। वे केन्द्र सरकार और राज्य सरकार से सम्मिलित रूप से आवेदन करें कि बागान में लेबर क्वार्टर के जमीन को चाय बागान के लीज से बाहर किया जाए और डीलीज (लीज से बाहर किए गए) जमीन को सौ सालों से बसे परिवारों के नाम पट्टा के माध्यम से वितरित किया जाए।
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#8) वे संसद में सरकार से मांग करें कि टी बोर्ड के अधीन गठित किए जाने वाले लेबर वेल्फेयर कमिटि के रिपोर्ट को हर साल संसद में पेश किया जाए और उक्त रिपोर्ट में उल्लेखित अनुशंसाओं को चाय अंचल के विभिन्न स्थानीय वेल्फेयर बोर्ड को भी मुहैया कराया जाए।
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#9) उत्तर बंगाल के चाय अंचल से संबंध रखने वाले सभी सांसद सम्मिलित रूप से राज्य सरकार से मांग करें कि राज्य सरकार द्वार गठित न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति के कामकाज को राज्य सरकार तुरंत पूरा करे और उसकी अनुशंसा के तुरंत लागू करे। वे मांग करें कि उन्हें उस समिति में पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।
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#10) अलिपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के संसद अपने MPLAD फंड से सम्मिलित रूप से डुवार्स या तराई में एक Skills Development Centre बनाएँ, जहाँ चाय बागानों के बच्चों को रोजगारमूलक प्रशिक्षण देने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत सीट आरक्षित रखा जाए।
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चाय मजदूरों के जीवन में अमूलचुल परिवर्तन करने के लिए और भी दर्जनों मांग हैं, या भविष्य में आ सकते हैं। लेकिन फिलहाल नये सांसद इन विषयों पर छह महीने के अंदर ठोस रूप से कार्य करें तो चाय बागानों की सामाजिक आर्थिक दशा बदल सकती है। मैं फेसबुक के अपने साथियों से अनुरोध करता हूँ कि वे इस पोस्ट को

 save करें या प्रिंट करके रख लें, ताकि हम इन मांगों पर अपनी बातें समयानुसार फिर से प्रस्तुत कर सकेंगे। कृपया इन मांगों पर अपने अपने लेवल पर चर्चा करें, और नये सांसदों को अपनी ओर से लिखित में मांग पत्र के रूप में पेश करें।