नहीं है शिक्षा का कोई विकल्प

Second ad

नेह अर्जुन इंदवार

Second ad

गरीबी, पिछडे़पन, मजबूरी आदि के चक्र से निकलने का एकमात्र उपाय उचित ढंग से शिक्षा प्राप्त करना ही है । इसके बिना दूसरा विकल्प या उपाय महज दिलासा दिलाने के सिवा कुछ नहीं है ।

आज जो भी आदिवासी इस कुचक्र से निकल चुके हैं वे किसी लाॅटरीे या खानदानी खेतबारी प्राप्त करने के कारण नहीं, बल्कि सिर्फ शिक्षा के बल पर ही एक सम्मानित, सुखमय जीवन जी रहे हैं । जो शिक्षा का महत्व नहीं जानते, वे पढ़ने लिखने में रूचि नहीं रखते । जो पढ़ने लिखने और मेहनत करने से भागते हैं, शिक्षा भी उनके पास आना नहीं चाहती है । जो शिक्षित नहीं है, वह पिछड़ा है, गरीबी भी उसका पीछा नहीं छोड़ती । शिक्षा और विकास में अत्यंत नज़दीक का  अंतरसंबंध है।

शिक्षा और ज्ञान बहुत मेहनत करने के बाद ही अपने दिल, दिमाग और घर परिवार में रखा जा सकता है । एक शिक्षित व्यक्ति अपने परिवार को निरंतर शिक्षित करता है । अपने परिवार के सदस्यों को हर विषय, मोड़ और परिस्थिति पर गाइड करता है । उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा देता है । भले बुरे की शिक्षा और विवेक के व्यावहारिक पक्ष को बताता है ।

 शिक्षा और ज्ञान का मतलब कोई सार्टिफिकेट प्राप्त करना नहीं है । सार्टिफिकेट तो पारंपारिक शिक्षा पद्धति का एक प्रतीक है, जो एक खास विषय या विषयों के समूह के एक निश्चित स्तर की जानकारी और ज्ञान की ओर इशारा करता है । शिक्षा और ज्ञान आदमी की सोच और चिंतन को तीक्ष्णता, गहराई, ऊँचाई और चौड़ाई देता है । शिक्षाहीन या बिना अध्ययनशील आदमी की सोच में वह पैनापन नहीं आता है, जो उन्हें अपने जीवन स्तर में निरंतर सुधार लाने के लिए प्रेरित करे ।

कहा जाता है, शिक्षा और ज्ञान की खोज की कोई उम्र नहीं होती है, वह जीवन के साथ निरंतर चलते रहता है और आदमी के जीवन की समाप्ति तक चलता है, जिसका लाभ उसके परिवार, समाज, देश और मानवीय सभ्यता को मिलता है । जब विद्यार्थी अपनी पढ़ाई पूरी कर लेता है और वास्तविक जीवन में प्रवेश करता है, तब उसे समाज, देश की परिस्थितियों को समझने के लिए निरंतर अध्ययन करने की जरूरत होती है । बिना अध्ययन के साधारण व्यक्ति की तो बात ही अलग, अपने क्षेत्र के ज्ञानी व्यक्तियों को भी महारत हासिल करने के लिए निरंतर अध्ययन करते रहना पड़ता है ।

अनेक विद्यार्थी सोचते हैं कि उन्होंने एक दो बार अपने पाठ को पढ़ लिया है और याद कर लिया है, परीक्षा या टेस्ट होगा तो वह उस विषय पर आराम से लिख लेगा ।

पढ़ाई, रटना और पाठ को याद कर लेना भर नहीं है । विद्यार्थी कम्प्यूटर नहीं होता कि उसने एक बार जो पढ़ लिया, वही बिना कोमा, फुलस्टाॅप में अंतर किए बाहर आ जाएगा । हर पाठ, लिखित या क्लास में दिए गए लेक्चर में एक संदर्भ, एक नया दृष्टिकोण, एक भावना, एक नयी सोच, नयी दिशा होती है । एक अध्ययनशील विद्यार्थी पाठ मेें छिपे उन संदर्भों को समझने का प्रयास करता है और उसे अपनी सोच, अपनी पृष्ठभूमि और एक नये मंच पर उन विचारों का मंचन करता है।

प्रत्येक पाठ उसे एक गहरी सोच की दुनिया में लेकर जाता है, जहाँ वह कई तरह के वातावरण, दृष्टिपटल पर उन विचारों को जोड़ता-घटाता है और नये-नये रंग में रंग कर, फिर से उसे मिटा कर नये विकसित माॅडल में ढालने का प्रयास करता है। पढ़ाई व्यक्ति के सामान्य सोच को विस्तार देने का तरीका है  ।

इसीलिए कहते हैं जो पढ़ता है, वह बढ़ता है । हर व्यक्ति का दिमाग उसकी ज़िन्दगी को चलाने का मुख्य इंजन होता है । इंजन जितना क्षमतावान होगा, गाड़ी भी उतनी ही गतिवान होगी । एक अशिक्षित व्यक्ति का दिमाग किसी विषय या चीजों को अनेक कोण, दृष्टिकोण, गहराई और पूरे संदर्भ के साथ समझ नहीं पाता है । इसीलिए उसका दिमाग सामान्य या रूटिन काम बखूबी कर लेता है, लेकिन किसी नयी चीज या विषय को समझने, करने और उसे नये संदर्भों के साथ जोड़ कर रचनात्मकता के साथ पूरा करने में दिक्कत होती है ।

घर की परिस्थिति, परिवार के लोगों की मनोदशा, सामाजिक संदर्भ और मनोविज्ञान का वह उस तरह से विश्लेषण नहीं कर पाता है जितना एक शिक्षित व्यक्ति कर पाता है । उसके निर्णय करने की क्षमता और सटिकता एक शिक्षित और ज्ञानी व्यक्ति से अलग होती है ।

जो बच्चे अपने पढ़ाई को गंभीरता से लेते हैं, घर के अभिभावक और बड़े बुज़ुर्ग की बातों को ध्यान में रखते हैं, अपने समय को अच्छी तरह से ज्ञान प्राप्ति में लगाते हैं, कामयाबी उसका खुले दिल से स्वागत करता है और वह जिंदगी में एक सफल व्यक्ति कहलाता है । परीक्षाफल या प्रतिफल किसी एक दिन की पढ़ाई पर आधारित नहीं होता है । अर्थात् परीक्षा के पूर्व खूब पढ़ाई कर लेने से मुकम्मल ढंग से शिक्षा प्राप्त हो जाए, यह मुमकिन नहीं है, ऐसी पढ़ाई परीक्षा में सिर्फ नम्बर लेने के काम आ सकता है । जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए जो ज्ञान, अनुभव, सोच, चिंतन विकसित करने की आवश्यकता होती है, वह ऐसी पढ़ाई से नहीं होती है । परीक्षा में आए नम्बर जीवन के गूढ़़ और जटिल समस्याओं को नहीं सुलझा सकते । उलझनों को एक सुलझा हुआ दिमाग ही सुलझा सकता है। गहरा और तीक्ष्ण दृष्टिकोण किसी पाठ के रटने से नहीं आता है । पाठ के सम्पूर्ण संदर्भ को जान कर उसके निहितार्थ को समझने से ही उस पाठ के असली मर्म को व्यक्ति प्राप्त करता है ।

व्यक्ति को सफलता चाहिए तो उसे शिक्षा और अध्ययन का मोल भी समझना होगा । बंगलुरू के एक व्यक्ति श्यामसुंदर को गरीबी के कारण पढ़ने का मौका नहीं मिला । चाय की दुकान पर काम करते हुए उसने किसी तरह अक्षर ज्ञान प्राप्त किया । ग्राहकों को चाय के साथ दिए जाने वाले भजिया, समोसा, बिस्कुट आदि के पेपर को वह फेंकने के बजाय अपने पास रख लेता था । समय मिलने पर वह उन कागजों को पढ़ने की कोशिश करता । लगातार कोशिश से वह पढ़ना सीख गया । दिन भर मजदूरी करते हुए, किसी भी कागज़ को पाने पर उसे बड़े ध्यानपूर्वक पढ़ता था । किसी स्कूली किताब, अखबार या पत्रिका के सिर्फ एक-दो पन्ने उपलब्ध होने पर भी वह उसे सुरक्षित अपने पास रखता और बार-बार ध्यान से पढ़ता । वह दुकान में आने वाले ग्राहकों की बातें बड़ी लगन से सुनता ।

सालों बाद उसे ओपन स्कूल में पढ़ने का मौका मिला । आश्चर्य की सीमा उनके अध्ययन संस्था की न रही, जब वह पूरे संस्थान में नियमित पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पछाड़ कर सर्वोच्च अंक लाया । बाद में उसका अध्ययन (रिसर्च ) एक शोध विद्यार्थी ने किया, तब पता चला कि उसके दिमाग ने असंख्या विषयों पर ज्ञान हासिल कर लिया था और ओपन स्कूल की परीक्षा उसने किसी ज्ञानी की तरह लिख कर दिया था । फेंके गए कागज के टुकड़ों को ध्यान से पढ़ने वाले वे व्यक्ति आज देश के एक नामी संस्थान में प्रोफेसर हैं । वे विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं और शिक्षा तथा लिखे गए शब्दों में छिपी शक्ति को पहचानने की कला सिखाते हैं ।

आदिवासी समाज और परिवारों में पाँव पसारे पिछड़ेपन, गरीबी को शिक्षा के बल पर सफलता पूर्वक दूर किया जा सकता है, और हर आदिवासी बच्चा शिक्षित, ज्ञानी और सफल सम्पन्न  व्यक्ति बन सकता है । लेकिन उसे अपनी पढ़ाई को बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत होगी । भले उसके पास स्कूल, शिक्षक या अन्य सुविधाएँ पूरी तरह उपलब्ध न हो। उसका कोई अपना न हो, तो बंगलुरू के श्यामसुंदर की तरह दुनिया में अकेले ही वह सफलता के लिए कड़ा संघर्ष कर सकता है।’’This work is copyright © Neh Arjun Indwar, Dec. 2014. All rights reserved

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *