प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा (कुड़ुख) में शिक्षा की सुविधाएँ

Second ad

                                                                                                             थदेयुस लकड़ा

third ad

(Facilities for instructions in mother tongue at primary stage) अनुच्छेद 350 A, 21 A, 29 (1) and 46

भारतवर्ष में राज्यों का गठन भाषा पर ही आधारित है। सावधानी बरतने पर भी सभी भाषाओं को जगह नहीं मिली। खास कर अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में तो संभव नहीं था, न है। क्योंकि अनुसूचित क्षेत्रों विभिन्न भाषा-भाषियों का वास भूमि है। बहुभाषाएँ (dialects) बोली जाती हैं। मूलतः अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के हित को ध्यान में रखते हुए, संविधान के रचयिताओं ने इस प्रावधान को रखा, ताकि संभावित सभी भाषाओं को समुचित अवसर मिले, विकास हो। किसी समाज को मातृभाषा व्यक्त करना नहीं पड़े, भाषा बचाई जा सके। आज विश्व में 16000 भाषा की जगह करीबन 6000 ही बचे हैं। अधिकतर बोलचाल (dialects) भाषा की लिपि नहीं है। सामाजिक उथल-पुथल में मिट गए होंगे। तो क्या इन भाषाओं में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएँ नहीं होंगी ? इस प्रश्न का जवाब है, हाँ।

प्रत्येक राज्य और राज्य के भीतर प्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बालकों को शिक्षा के प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था करने का प्रयास करेगा और राष्ट्रपति किसी राज्य को ऐसे निर्देश दे सकेगा, जो वह ऐसे सुविधाओ%