MP और MLAs ने विकास फंड को कहाँ किए खर्च ?

Parliament Local Area Development Scheme (MPLADS) और Bidhayak Elaka Unnayan Prakalpa विधायक इलाका उन्नयन प्रकल्प (BEUP) दो ऐसे फंड हैं, जिसके द्वारा इलाके के सांसद और विधायक अपने-अपने इलाके में जनता के हित के लिए विभिन्न विकास योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं।
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MPLADS में सांसद के हाथ में एक वर्ष में 5 करोड़ खर्च करने का अधिकार होता है। वहीं विधायक अपने इलाके में वर्ष में 60 लाख रूपये खर्च कर सकता है।
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डुवार्स तराई एक पिछड़ा हुआ इलाका है। यहाँ एक-एक रूपये का व्यय मायने रखता है।
मैं डुवार्स-तराई के सांसद
श्री जॉन बारलाजी,
श्री राजु विष्टजी और
डा. जयंत कुमार राय से
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साथ ही डुवार्स तराई के
विधायकगण
श्री सुनील तिर्कीजी,
श्री बुलु चिक बड़ाईकजी,
श्री सुकरा मुण्डाजी,
श्रीमती मिताली रायजी,
श्री मनोज तिग्गाजी,
फालाकाटा के माननीय विधायक अधिकारीजी या उनके सहयोगी,
श्री विल्सन चंप्रामरीजी,
श्री सौरव चक्रवर्तीजी,
श्री जेम्स कुजुरजी
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से निवेदन करता हूँ कि कृपया आप अपने इलाके में
MPLADS और BEUP

के अन्तर्गत खर्च किए गए योजना / प्रकल्प या प्रस्तावित योजना और प्रकल्प का नाम जनता को सार्वजनिक रूप से अखबार या अपने प्रतिनिधियों से माध्यम से बताएँ और जनता को जागरूक करें।
जनता के पक्ष में आपकी तत्परता और सदभावना का हम तहे दिल से प्रशंसा करते हैं और धन्यवाद देते हैं।
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तराई-डुवार्स के फेसबुक साथी गण कृपया इसे अपने वाल पर कॉपी-पेस्ट करके पोस्ट करें और हमारे जन प्रतिनिधियों तक पहुँचाने के लिए सहयोग करें। विकास का ठोेस काम सबके सहयोग से ही सम्भव है। आप सबों को भी अग्रिम धन्यवाद।

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देश में व्‍याप्‍त कट्टरता, अन्‍याय, जातिवाद, धर्मवाद, सम्‍प्रदायवाद, नफरतवाद, संकीर्णता आदि विचारों को अपनी उदात्त लेखनी से जागरूक नागरिकगण, साहित्‍यकार और कलम के असली जादूगर ही कम करते हैं और वैज्ञानिक तथा नवीन उदार विचारों को आम नागरिकों के लिए परोसते हैं।
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लेकिन धर्म और धार्मिक संगठनों के नाम पर ब्राह्मणवाद, पूरोहितवाद, वर्चस्ववाद, सामंतवाद, जातिवाद का पोषण करने वाले तत्‍वों को यह पसंद नहीं है, क्‍योंकि सदियों से चली आ रही उनके वर्चस्‍ववाद को उदार विचारों से गंभीर चोट लगती है। उन्हें सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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संसार के सभी धर्म, धर्म संगठन, धार्मिक सिद्धांत और विचारधारा तथा उसके अनुषांगिक साहित्य, मीडिया आज सचेत शिक्षित जनों के अन्वेषक-खोजी-निगाहों के निशाने पर है, तथा धर्म का बेजा इस्तेमाल करके अपनी दुकान चलाने वाले भी आम जनता के खोजी निगाहों में आ चुके हैं।
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शिक्षा और ज्ञान स्रोतों की विश्वव्यापी अबाध उपलब्धता और समस्त विषयों पर निरंतर चलने वाले विश्वव्यापी सार्वजनिक विचार विमर्श, चर्चा-सत्र् ने आम जनता को वास्तविक रूप से जागरूक बनाया है।
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विवेकवान व्यक्ति न सिर्फ खुद जागरूक होता है, बल्कि वह परिवार और समाज को भी जागरूक बनाने में भूमिका निभाता है। कोई भी अपने बच्चों को निकृष्ट मूल्य और विरासत सौंपना नहीं चाहता है। इंसानियत और सभ्यता का विकास इसी विवेकशीलता के कारण होता आया है। यही नये विकसित विचारों की सृजन प्रक्रिया है।
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धर्म, जातिवाद, पंथवाद मनुष्य के बीच विभाजन और अलगाव उत्पन्न करता है। ये दिमाग को संकुचित विचारों और व्यवहारों के खूँटी से बाँधे रखता है। भाईचारा, इंसानियत के बजाय यह अशिष्ट भावनाओं को स्थायित्व प्रदान करता है।
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दुनिया आज एक गाँव बन गया है। दुनिया भर के मनुष्य एक दूसरे से जुड़ रहे हैं। ऐसे में प्राचीन काल की कुछ विचार, सोच और मूल्य यदि दो भाई और दो समाज को एक दूसरे से दूर करता है, कटुता की भावनाओं को उत्पन्न करता है तो समझिए ऐसे मूल्य और विचारधारा तज्य है। जाहिर है कि हम ऐसे नकरात्मक विचारों से नियंत्रित होना पसंद नहीं करेंगे।
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आधुनिक शिक्षित समाज में हर व्यक्ति जागरूक है, समझदार है, विवेकशील है, बुद्धिमान है। सभ्यता के नवाचार ने उन्हें अभिव्यक्ति के अनेक साधन मुहैया कराए हैं। आज हर शिक्षित के पास आधुनिक मीडिया की पहुँच है। वे अभिव्यक्ति के अधिकारों का उपभोग भी कर रहे हैं। समाज, सभ्यता के विकास के लिए उन्हें अपनी इलेक्ट्रॉनिक लेखनी का सटीक संयमित इस्तेमाल पूरजोर से करना चाहिए। यह उनके अधिकार क्षेत्र में है।
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याद रखें, सभ्यता के द्वारा आपको दी गई यह अनमोल मानवीय स्वतंत्रता है।